EMI kya hota hai | EMI क्या है? EMI की गणना कैसे करे

ईएमआई (EMI) का मतलब होता है इक्वेटेड मासिक इंस्टॉलमेंट या बराबर मासिक किस्त। यह एक ऐसी व्यवस्था होती है जिसके तहत आप बड़ी रकम के लिए भुगतान करने के लिए धन को बाँट सकते हैं, जो आमतौर पर बैंक या वित्तीय संस्था से होती है। इस लेख में, हम जानेंगे कि EMI kya hota hai, इसके प्रकार, लाभ, और इसका उपयोग कैसे किया जाता है।

EMI क्या है? (EMI kya hota hai)

EMI (Equated Monthly Installment) एक प्रकार का उधार है जिसमें बड़ी राशि के लोन को छोटे-छोटे मासिक किश्तों में भुगतान करने की सुविधा प्रदान की जाती है। यह किश्तों में भुगतान की सुविधा देकर लोगों को बड़ी खरीदारी करने का मौका देता है, जैसे कि घर, कार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, या किसी अन्य चीज़ को खरीदने के लिए। यह लोन लेने वाले व्यक्ति को निर्धारित अवधि तक मासिक किश्तों में लोन का भुगतान करने की सुविधा देता है, जिसमें प्रत्येक किश्त में मुख्य राशि के साथ ब्याज का भी भुगतान होता है।

इस प्रकार, EMI व्यक्ति को बड़ी राशि के भुगतान से बचाकर उसे सुविधाजनक तरीके से उपयोग करने की अनुमति देता है। EMI का उपयोग व्यक्तिगत या व्यापारिक उद्देश्यों के लिए बड़े मात्रा में धन को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

दूसरे शब्दों में कहे तो- EMI एक प्रकार का क्रेडिट होता है जिसे व्यक्ति या संस्था अपनी व्यक्तिगत या व्यापारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग कर सकती है। यह आमतौर पर बड़े खरीदारी जैसे कि घर, गाड़ी, स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, या अन्य आवश्यक सामग्री को खरीदने के लिए उपयोग किया जाता है।

EMI kya hota hai

EMI कैसे काम करता है?

EMI तब शुरू होता है जब कोई व्यक्ति या ग्राहक एक उत्पाद या सेवा की खरीद करने का निर्णय लेता है और उसे एकत्रित की जाने वाली रकम का भुगतान करने में समर्थ नहीं होता है। इस परिस्थिति में, वह उत्पाद या सेवा खरीदने के लिए वित्तीय संस्था से लोन लेता है। इस लोन की मान्यता के लिए व्यक्ति को वित्तीय संस्था के साथ नियमित अंतरालों में निश्चित राशि में धन का भुगतान करना होता है।

EMI का सिस्टम कैसे कार्य करता है, इसे समझने के लिए यहां एक उदाहरण है: यदि कोई व्यक्ति एक बैंक से 5 लाख रुपये का लोन लेता है, जिस पर वह बैंक को 3 साल (36 महीने) में वापस करने का समझौता करता है, तो ईएमआई के जरिए उसे लोन के ब्याज का भुगतान करना होता है। यहां, लोन की मूल रकम 5,00,000 रुपये है और ब्याज दर 10% प्रति वर्ष है। इस दौरान, व्यक्ति को हर महीने ब्याज के साथ लोन की एक निश्चित राशि का भुगतान करना होता है।

EMI की गणना के लिए फॉर्मूला है-

EMI=P×r×(1+r)n/((1+r)n1)

यहां,

= 5,00,000 रुपये (मुख्य राशि)

= 10% वार्षिक ब्याज दर, इसे महीने में बाँटा गया = 10/(12×100)=0.00833

= 36 महीने (किश्तों की संख्या)

अब हम EMI की गणना करते हैं-

EMI=5,00,000×0.00833×(1+0.00833)36/((1+0.00833)36−1)

EMI≈ 15,710 रुपये

इस प्रकार, इस व्यक्ति को हर महीने लगभग 15,710 रुपये की EMI देनी होगी। यह राशि मुख्य लोन राशि के साथ ब्याज को जोड़कर निर्धारित की जाती है, जो उसे 3 साल में चुकानी होगी।

EMI का उपयोग-

ईएमआई (EMI) का उपयोग बड़ी रकम की खरीदारी के लिए धन को व्यवस्थित रूप से भुगतान करने में किया जाता है। यह व्यक्तिगत या व्यापारिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है जैसे कि घर, गाड़ी, स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, या अन्य आवश्यक सामग्री को खरीदने के लिए।

यह तकनीकी उपाय है जो व्यक्ति को बड़ी रकम को छोटे मासिक किश्तों में भुगतान करने की सुविधा प्रदान करता है। इससे लोग एक साथ बड़ी राशि का भुगतान नहीं करते हैं, बल्कि वे मासिक आधार पर नियमित रूप से आईटम की किश्तों को भुगतान करते हैं।

ईएमआई की सुविधा से लोग अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार बड़ी राशि को आसानी से संभाल सकते हैं और बिना बड़ी आर्थिक दबाव के वस्तुओं को खरीद सकते हैं। इसके साथ ही, यह व्यक्ति को ब्याज की दर पर बुरा असर नहीं पड़ता क्योंकि वे मुख्य राशि के साथ ही ब्याज को भी मासिक रूप से भुगतान करते हैं।

EMI के प्रकार-

ईएमआई के कई प्रकार होते हैं। इनमें से कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं-

  1. समान मासिक आवेदन (Equal Monthly Installments – EMI)- यह सबसे सामान्य प्रकार की ईएमआई है जिसमें व्यक्ति को निर्धारित समयावधि में समान राशि में भुगतान करना पड़ता है। इस प्रकार की ईएमआई में ब्याज और मुख्य राशि को मिलाकर हर महीने एक निश्चित राशि में विभाजित किया जाता है।
  2. सीमित समयावधि ईएमआई- इस प्रकार की ईएमआई में व्यक्ति को निश्चित समयावधि तक भुगतान करना होता है, जैसे कि 6 महीने, 1 वर्ष या अधिक। इस समयावधि के अंत में, उत्पाद या सेवा की पूरी राशि का भुगतान हो जाता है।
  3. ब्याज मुक्त ईएमआई- कुछ वित्तीय संस्थान या बैंक ब्याज मुक्त ईएमआई भी प्रदान करते हैं, जिसमें व्यक्ति को ब्याज का कोई प्रकारी भुगतान नहीं करना पड़ता है। इसमें केवल मुख्य राशि को नियमित अंतराल पर भुगतान करना होता है।
  4. क्रेडिट कार्ड ईएमआई- क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान की गई राशि को भी ईएमआई के रूप में नियमित अंतराल पर निपटान किया जा सकता है। यह वित्तीय संबंधों में व्यक्तियों को आराम और सुविधा प्रदान करता है।

EMI के लाभ-

ईएमआई (EMI) कई तरह के लाभ प्रदान करती है। यहां कुछ मुख्य लाभ है-

  • सुविधाजनक भुगतान- ईएमआई व्यक्तियों को बड़ी राशि में धन का प्राप्त करने की सुविधा देता है। वे नियमित अंतराल पर समान मासिक आवेदन भुगतान करके अपनी आर्थिक स्थिति को सुनिश्चित कर सकते हैं।
  • आर्थिक स्थिरता- ईएमआई द्वारा व्यक्तियों को उत्पाद या सेवा की खरीदारी के लिए धन उपलब्ध कराने से उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
  • ब्याज की संभावना- ईएमआई के माध्यम से धन प्राप्त करने पर ब्याज की राशि नियमित अंतराल पर भुगतान करने की सुविधा देती है, जिससे ब्याज की राशि कम हो सकती है।
  • आर्थिक योग्यता- व्यक्तियों को ईएमआई के माध्यम से धन प्राप्त करने की सुविधा देने से उन्हें बड़ी राशि में निवेश करने की योग्यता मिलती है, जो उनकी आर्थिक वृद्धि में सहायक होती है।

EMI के नुकसान-

ईएमआई (EMI) का उपयोग कई लाभों के साथ होता है, लेकिन कई समयों पर इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। यहां कुछ ईएमआई के नुकसान दिए गए हैं-

  • अतिरिक्त ब्याज की भुगतान- ईएमआई के माध्यम से धन प्राप्त करने पर, व्यक्ति को अतिरिक्त ब्याज की राशि भी देनी पड़ सकती है। अगर किसी को नियमित भुगतान करने में कठिनाई होती है, तो ब्याज की राशि और दबाव बढ़ सकता है।
  • क्रेडिट स्कोर में गिरावट- अगर किसी व्यक्ति को ईएमआई की नियमित भुगतान करने में कठिनाई होती है या वह यह निर्धारित समय पर नहीं कर पाता है, तो उसका क्रेडिट स्कोर गिर सकता है। यह आने वाली वित्तीय लेनदेनों में दिक्कत डाल सकता है।
  • नकारात्मक आर्थिक प्रभाव- ईएमआई की नियमित भुगतान करने में किसी की कठिनाई होने पर, व्यक्ति को नकारात्मक आर्थिक प्रभाव भी हो सकता है। यह आर्थिक तंत्र में प्रतिबंध डाल सकता है और वित्तीय स्थिति को कठिन बना सकता है।
  • बढ़ती देनदारी- ईएमआई के बारे में सोचते समय, अधिकतम आर्थिक दबाव में व्यक्ति बढ़ती देनदारी में भी पड़ सकता है। इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

निष्कर्ष-

EMI kya hota hai- ईएमआई एक महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरण है जो व्यक्तियों को उधार लेने की क्षमता प्रदान करता है और उन्हें संबंधित ब्याज दरों के साथ स्वीकार्य भुगतान विधि प्रदान करता है। इसका सही इस्तेमाल करके लोग अपनी आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं और आगे की योजनाओं को सम्पन्न करने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

FAQs

1. EMI पर ब्याज दर का क्या प्रभाव पड़ता है?

EMI पर ब्याज दर का प्रभाव व्यक्ति के वित्तीय लेनदेन पर काफी महत्वपूर्ण होता है। ब्याज दर निर्धारित करती है कि व्यक्ति या व्यापारी कितना ब्याज देने के लिए तैयार होता है, जो कि उनके EMI भुगतान में जोड़ा जाता है। ब्याज दर कम होने पर EMI की राशि कम होती है और ब्याज दर बढ़ने पर EMI की राशि भी बढ़ सकती है।

2. क्या देर से ईएमआई भुगतान क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करता है?

हाँ, देर से ईएमआई भुगतान करने से क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव पड़ सकता है। क्रेडिट स्कोर व्यक्ति की वित्तीय जिम्मेदारियों का एक मापदंड होता है और धनिक इतिहास को दर्शाता है। अगर व्यक्ति ईएमआई की नियमित तारीके से भुगतान नहीं करता है या देर से भुगतान करता है, तो उसका क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है।

3. ईएमआई के कैलकुलेशन के लिए कौन-कौन से कारक महत्वपूर्ण होते हैं?

ईएमआई के कैलकुलेशन में कई महत्वपूर्ण कारक होते हैं, जो भुगतान की राशि को निर्धारित करते हैं। निम्नलिखित कारक इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होते हैं-

  • प्राथमिक राशि (Principal Amount)- यह वह राशि होती है जिसे व्यक्ति उत्पाद या सेवा की खरीदारी के लिए लेता है और जिस पर EMI की गणना की जाती है।
  • ब्याज दर (Interest Rate)- यह ब्याज की दर होती है जो EMI में शामिल होती है। ब्याज दर के आधार पर EMI की गणना की जाती है और यह व्यक्ति को ब्याज का भुगतान करने के लिए निर्धारित की जाती है।
  • भुगतान की अवधि (Loan Tenure)- यह वह समयावधि होती है जिसमें व्यक्ति ने ईएमआई की भुगतान करने के लिए समय निर्धारित की होती है। यह अवधि EMI की गणना में महत्वपूर्ण होती है।
  • ब्याज के वितरण की प्रक्रिया (Amortization Process)- इससे EMI का और मुख्य राशि के बीच का वितरण होता है ताकि हर महीने का EMI ब्याज और मुख्य राशि का हिस्सा होता है।
4. क्या सिर्फ लोन में ईएमआई विकल्प उपलब्ध हैं?

नहीं, खुदरा खरीदारी में भी ईएमआई विकल्प उपलब्ध होते हैं जो महंगीनहीं, ईएमआई विकल्प सिर्फ लोनों में ही नहीं, बल्कि विभिन्न खरीदारी ऑप्शन्स में भी उपलब्ध होते हैं। बड़ी-बड़ी खरीदारी, जैसे कि ऐप्लायंसेज, स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स, या अन्य महंगी चीजें खरीदते समय, बहुत से रिटेलर्स या बैंक ईएमआई ऑप्शन्स प्रदान करते हैं। यह उन्हें ग्राहकों को अधिक सहज रूप से महंगी चीजों को खरीदने की सुविधा देते हैं।खरीदारी को किफायती बनाते हैं।

5. क्या ईएमआई का भुगतान एडवांस में कर सकते हैं?

हाँ, कुछ लेंडर्स इसकी अनुमति देते हैं कि आप ईएमआई के भुगतान को अग्रिम में कर दें, लेकिन हर लेंडर की नीति अलग होती है। यह आपके लोन कंट्रैक्ट और लेंडर के शर्तों पर निर्भर करता है। कुछ लोग इस सुविधा का उपयोग करते हैं ताकि उनकी आगामी ईएमआई की देय राशि को कम किया जा सके, लेकिन फिर भी इससे पहले आपको अपने लेंडर से संपर्क करना चाहिए और उनकी नीति को समझना चाहिए।

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