how to develop personality hindi | अपनी पर्सनालिटी को कैसे बढ़ाये

हर कोई अपनी पर्सनालिटी को डेवलप करना चाहता है, लेकिन आज मै आपको कुछ ऐसे टिप्स बताऊंगा? जिससे आप अपने पर्सनालिटी में चार चाँद लगा सकते है, how to develop personality hindi.

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दोस्तों पर्सनालिटी डेवलपमेंट की बात करने से पहले हमें समझाना होगा की आखिर पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्या है? और हमारी  पर्सनालिटी किन चीजो से मिलकर बनती है|

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What is personality ( पर्सनालिटी (व्यक्तित्व ) क्या है)-

पर्सनालिटी (व्यक्तित्व ) किसी एक चीज का नाम नहीं है, बल्कि इसमें व्यक्ति के बाह्य सौंदर्य के के साथ-साथ भीतरी सौंदर्य एवं गुणो का भी समावेश होता है| पर्सनालिटी को गहराई से समझने के लिए इसे इस प्रकार समझे-

पर्सनालिटी = बाह्य पर्सनालिटी  + आंतरिक पर्सनालिटी

ठीक इसी प्रकार :-

आकर्षक पर्सनालिटी = व्यक्ति के बाह्य सौन्दर्य + व्यक्ति के भीतरी गुणो का सौन्दर्य

व्यक्ति के बाह्य सौन्दर्य में आता है – उसका शारीरिक गठन वा खूबसूरती, उसके उठने बैठने का ढंग, व्यक्ति का पहनावा आदि| कहने का मतलब वो सभी बाते जिसमे व्यक्ति की बाहरी सुन्दरता दिखाती है |

व्यक्ति के भीतरी गुणो के सौन्दर्य में आता है हमारा तात्पर्य, व्यक्ति के भीतरी वो गुण जिनकी वजह से असल आकर्षण निखरकर सामने आता है, उसका यही गुण व्यक्ति के पर्सनालिटी में चार चाँद लगा देता है|

कोई भी व्यक्ति अपने भीतरी गुणो के कारण ही सफलता की बुलंदियों को छु पाता है,? [कहने का तात्पर्य यह है की व्यक्ति की सफलता में अगर व्यक्ति का बाह्य सौन्दर्य 10% भूमिका निभाता है तो व्यक्ति के भीतरी गुणो का सौन्दर्य 90% भूमिका निभाता है]

व्यक्ति के भीतरी गुणो में व्यक्ति का चरित्र, व्यक्ति का व्यवहार, व्यक्ति के देखने, सोचने वा समझने का नजरिया? और काम करने का ढंग आदि आते है|

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1) स्वंय की पहचान करे –

बहुत से लोगो के सामने ये समस्या आती है की वो स्वंय की पहचान नहीं कर पाते, या फिर उन्हें पता ही नहीं होता की स्वंय की पहचान कैसे करे?

किस तरह हम अपने गुणो और अवगुणो को जाने ?

किस तरह हम अपनी शक्तियों और समय का सही उपयोग करे ?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार स्वंय के गुण -अवगुण की पहचान के लिए वैसे तो हमारे पास कई उपाए हो सकते है, पर इन्हें हम मुख्य रूप से दो भागो में बाटते है –

  1. अपने आप खुद का बार-बार निरिक्षण वा अवलोकन करना |
  2. विश्वसनीय, समझदार, गंभीर और सफल लोगो से परामर्श लेना |
  • अपने आप खुद का बार-बार निरिक्षण वा अवलोकन करना-

आत्मनिरीक्षण करना ही व्यक्तित्व विकास का पहला चरण है| इसे आप उस डॉक्टर के रूप में ले सकते है सकते है जो मृत शारीर का पोस्टमाटम करता है, पर यहाँ पर शारीर भी आपका है और डॉक्टर भी आप ही है | इसे स्वंय का बार-बार निरिक्षण वा अवलोकन करना है| आत्मनिरीक्षण पद्धति में आपका प्रतिदिन इसका अभ्यास करना है|

आत्मनिरीक्षण के भी दो रूप है –

1) डायरी लेखन यानी डायरी में अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या का सही-सही लेखा जोखा तैयार करना|

2) सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले मानशिक अवलोकन | सुबह के समय दिनभर में करने वाले कार्यक्रमों का अवलोकन करना,            और  रात को सोते समय दिनभर में घटने वाली घटनाओ का अवलोकन करना या आत्मनिरीक्षण करना|

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  • विश्वसनीय, समझदार, गंभीर और सफल लोगो से परामर्श लेना-

विश्वसनीय व्यक्तियों में माता-पिता, भाई-बहन, और परिजन आते है, जो हमेसा हमारा भला और अच्छा सोचते है| ऐसे सभी विश्वसनीय व्यक्तियों से भी हम अपने बारे में पूछ सकते है|

हमारे शिक्षक, अध्यापक, वा गुरुजन गंभीर होते है, ऐसे लोग हमेशा हमारे हित व भले के लिए सोचते है? उनसे भी हम अपने बारे में पूछ सकते है|

सफल, समझदार में हम उनको ले सकते है, जो अपने अनुभव वा ज्ञान की विशिष्टता द्वारा मार्गदर्शन कर सकते है| जैसे सफल लोग कैसे सफल हुए? किस तरह से उन्होंने अपने गुणो का विकास व अवगुणो को दूर किया? कैसे उन्होंने अपनी असफलताओ को सफलता में बदला? कैसे उन्होंने अपनी परेशनियो व मुसीबतों का मुकाबला किया? यह सब जानने को मिलेगा? जिससे आपको अपने जीवन सुधारने व व्यवस्थित करने में बहुत आसानी होगी|

2) अपनी कार्यक्षमता का विकास करे –

मै ऐसे बहुत से लोगो के जानता हूँ, जिनका कहना होता है की पहले उनकी कार्यक्षमता बहुत अच्छी होती थी| वे लोग अपने काम को बहुत जल्दी निपटा लिया करते थे| पहले उन लोगो के पास फाइले कम होती थे, काम में मन लगता था और कार्य के प्रति एकाग्रता भी अच्छी बनी रहती थी| जिस कारण वे अपना काम समय से और सहजता से पूरा कर लेते थे, पर अब स्थिती बिल्कुल उलटी हो गई है| आज वे जितना काम तीन दिन में निपटाते है, उतना काम पहले वो एक दिन में निपटा देते थे| तरक्की के साथ साथ दूसरे बहुत से कार्य और जिम्मेदारिय भी दिन प्रतिदिन बढती जा रही है| ऐसी स्थिती में उनकी कार्यक्षमता और एकाग्रता में कमी आ गई है?

कुछ लोग अपनी कार्यक्षमता की कमी के कारण को जान लेते है? और उसका समाधान निकलने का प्रयत्न भी करते है| इसके विपरीत ज्यादातर लोग कार्यक्षमता की कमी के कारण को नहीं जान पाते| उनका जीवन जैसा चल रहा है, वैसा ही चलता रहता है | उनकी बेचैनी और परेशानिया दिन-प्रतिदिन बढती ही जाती है | उन्हें चैन नहीं मिलता और रात को ठीक से सो भी नहीं पाते|

अब सवाल यह उठता है की अपनी कार्यक्षमता को किस प्रकार बढाया जाये? और ऐसा क्या किया जाये जिससे हम अपने कार्यो को समय पर समाप्त कर सके?

मनुष्य की कार्यक्षमता मुख्य रूप से दो बातो पर निर्भर करती है?

  1.  अपनी कार्यक्षेत्र का नवीनतम ज्ञान
  2. एकाग्रता
  • अपनी कार्यक्षेत्र का नवीनतम ज्ञान –

आप जिस क्षेत्र में भी काम कर रहे है, कार्यक्षमता में विकास के लिये उस कार्यक्षेत्र का आपको ज्ञान होना आवश्यक है, जितना हो सके उस क्षेत्र का ज्ञान लेते रहे| उदाहरण के लिए –

यदि आप कंप्यूटर इन्जीनियर है तो आपको कंप्यूटर के क्षेत्र का पूरा नॉलेज होना चाहिए और साथ ही साथ उस क्षेत्र की नवीनतम जानकारी भी होनी चाहिए?

आप फिल्म निर्देशक है तो आपको फिल्म जगत से जुडी सभी तकनीको की जानकारी होना आवश्यक है?

यदि आप एक डॉक्टर या सर्जन है तो? आपको अपने पेशे से जुडी नई वैज्ञानिक तकनीको व शोध की जानकारी लेते रहना चाहिए?

यदि आप ऐसा नहीं करते है तो, वह दिन दूर नहीं जब आप अपने ही कार्यक्षेत्र में कोई सही निर्णय नहीं ले पाएँगे और दुसरो से पिछड जाएँगे? परिणाम यह होगा की आपकी कार्यक्षमता दिन प्रतिदिन कम हो जाएगीऔर एक दिन आपको असफल होकर बैठ जाना पड़ेगा?

क्या आप ऐसा चाहेंगे?

यक़ीनन नहीं?

इसलिए आप जिस क्षेत्र में भी कार्य कर रहे है, उससे सम्बंधित सभी नई जानकारियां अवश्य लेते रहे|

  • एकाग्रता

किसी भी व्यक्ति के कार्यक्षमता के विकास का मूलभूत आधार है मानशिक एकाग्रता| इसलिए इसका जितना विकास करेगे उतना ही आपकी कार्यक्षमता बेहतर होगी|

हम अपनी मानशिक एकाग्रता के आधार पर ही अपने किसी भी कार्य व उसकी कार्यप्रणाली को समझकर उसे आसानी से पूरा करते है|

जहाँ मानसिक एकाग्रता में कमी आ जाती है? वहां ज्ञान व क्षमता होने के वावजूद कोई भी कार्य कुशलतापूर्वक संपन नहीं हो सकता? इसलिए हमें हमेसा यह ध्यान में रखना चाहिए की जो भी कार्य करे, उसमे पूरी मानसिक शक्ति लगा दे?

दूसरो से दोष व ईर्ष्या रखने के वजाये यदि आप यह सोचे की?

  • ऐसा क्या कारण है की दूसरे आपसे ज्यादा सफल है और आप उनकी तुलना में कम |
  • ऐसे कोन से गुण उनमे है जो आपमें नहीं है |
  • ऐसी कोन सी योग्यताएं उनमे है जो आपमें नहीं है |
  • फिर अपने आपको उनके मुकाबले में तैयार करे |

3) अपने लिए समय निकाले –

बहुत से ऐसे लोग होते है जो अपने लिए समय ही नहीं निकाल पाते, ऐसे लोगो के जीवन में एक ऐसा समय भी आता है जब लोग बहुत कुछ चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते| इसलिए यह आति आवश्यक है की आप अपने स्वंय के विकास और आत्मविकास के लिए कम से कम 1 घंटे का समय जरूर निकाले| इस 1 घंटे में आप एकाग्र होकर स्वंय का अध्यन करे|

ऐसा करने से प्रभाव यह होगा की आपकी मानसिक शक्तियों का विकास होगा और मानसिक शक्तियों के विकास से कार्यक्षमता बढ़ेगी|

कहने का तात्पर्य यह है की एकाग्रता के अभाव में आपका जो कार्य दस घंटे में होता था? वही कार्य एकाग्रता के कारण दो घंटे से कम समय में पूरा हो सकता है? सही निर्णय लेने में जहाँ आपको अनेक दिन व महीने लग जाते थे, वहीँ अंत: द्रष्टि व आत्म विश्वाश से चंद मिनटों में सही निर्णय ले पाने में सक्षम हो जाते है|

इसलिए आप अपनी आंतरिक क्षमताओं को नष्ट होने से बचाये? अपनी भीतर छुपी शक्तियों और वैभव को पहचाने|

सफल एवं खुशहाल जीवन तथा सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए अपनी क्षमताओं व शक्तियों का भरपूर उपयोग करे|

यदि आप अपनी भीतर छुपी शक्तियों को न पहचानकर कोई कार्य करेगे तो? उसका अर्थ यह होगा की आप ईधन की परवाह किये बिना ही गाड़ी चलाना चाहते है? ऐसे में आपकी गाड़ी कितने दिन और कितने दूर तक चल पायेगी, यह आप अच्छी तरीके से जानते है|

4) लक्ष्य निर्धारित करे –

क्या आप किसी ऐसी बस या ट्रेन में यात्रा करना चाहिंगे जिसके बारे में आपको पता ही न हो, की वह बस या ट्रेन कहा जा रही है|

यक़ीनन नहीं |

आप ही क्यों, शयद दुनिया का कोई भी समझदार व्यक्ति किसी ऐसी बस या ट्रेन में बैठकर यात्रा करना नहीं  चाहेगा, जिसकी मंजिल का उसे पता ही न हो|

परन्तु कितने ताज्जुब की बात है की अगर आप अपने चारो ओर देखे तो पाएँगे की न जाने कितने लोग बिना मंजिल के ही जीवन यात्रा कर रहे है|

दोस्तों आपका जीवन मूर्खो या बच्चो का खेल नहीं है, जिसे जो चाहे जैसा चाहे खेल ले और आप देखते रहे? आपको अपने जीवन को सफल बनाना है? और इसके लिए सर्वप्रथम आपको अपने जीवन के उद्देश की खोज करनी है? फिर उसे पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करना है, और सफल होना है|

जीवन को सफल बनाने के लिए सूझ-बूझ के साथ कठिन परिश्रम और लक्ष्य का निर्धारण करना भी आवश्यक है? अपने लक्ष्य की खोज  तथा उसका निर्धारण ही आपके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है|

अगर आप अपने चारो ओर देखे तो पाएँगे की बहुत ही कम लोग होते है जो अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित करते है? ज्यादातर लोग न तो अपने जीवन का उद्देश जान पाते है? और न ही अपने जीवन का मूल्यांकन कर पाते है? इसलिए आप अपने जीवन के उद्देश को जितनी जल्दी हो सके खोज ले? जितनी जल्दी लक्ष्य निर्धारित कर लेंगे, उतना ही आपके लिए बेहतर होगा|

और पढ़े – लक्ष्य बनाने के तरीके | लक्ष्य कैसे हासिल करे |

5) आत्मविश्वास  रखे –

आत्मविश्वास  क्या है? यह आत्म और विश्वास  से मिलकर बना है|

यहाँ आत्म का तात्पर्य है – स्वंय, अपना या खुद अर्थात हम अपने आपको जिस भी वर्तमान में अनुभव करते है|

विश्वास  का अर्थ है – निष्ठा, भरोसा, आस्था आदि |

इस प्रकार आत्म विश्वास  का शाव्दिक अर्थ हुआ स्वंय में आस्था और विश्वास  रखना |

हम सभी में अच्छाई एवं बुराई दोना का अस्तित्व होता है| अब सवाल यह उठता है की जैसा हमारा अस्तित्व है वैसा हम उसे स्वीकार करते है या नहीं | अतः आत्म विश्वास  अपने आप पर भरोसा करना है, यह स्वंय की स्वीकृति है की हम अपने आप को कितना और किस तरह स्वीकार करते है|

आत्म विश्वास का प्रभाव हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर पड़ता है| हमारी सफलता, असफलता, और आपसी संबंधो पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है| इसलिए अपने आप भरोसा रखना बहुत ही जरूरी है |

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तो दोस्तों ये था आज का आर्टिकल (how to develop personality hindi) जिसमे मैंने आपको बताया की आप किस तरह से अपनी पर्सनालिटी को डेवलप कर सकते है|

इस आर्टिकल को बहुत ही आसान शब्दों में लिखा गया है ताकि आप अच्छे से समझ सके, लेकिन फिर भी अगर आपके दिमाग में कोई सवाल या कोई बवाल है कमेंट में बताना न भूले|

how to develop personality hindi- इस आर्टिकल को पढने के बाद आप अपने पर्सनालिटी को बहुत आसानी से इम्प्रूव कर सकते हो|

दोस्तों उम्मीद करता हूँ आपको हमारा ये आर्टिकल (how to develop personality hindi) पसंद आया होगा? अगर आपका इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सवाल है तो आप मुझे नीचे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकते है|

”धन्यवाद ”

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  • स्वंय की पहचान करे
  • अपनी कार्यक्षमता का विकास करे 
  • अपने लिए समय निकले 
  • लक्ष्य निर्धारित करे 
  • आत्मविश्वास  रखे 
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