HTTP kya hai | HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) क्या है

वर्तमान समय में इंटरनेट एक ऐसा माध्यम बन गया है जिसने हमारे जीवन को सरल और संचार में सुगम बना दिया है। यहाँ तक कि इंटरनेट ने हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रभाव डाला है, चाहे वह व्यापार, शिक्षा, मनोरंजन, सामाजिक संचार या किसी भी अन्य क्षेत्र का हो। जब हम वेब ब्राउज़र में किसी वेबसाइट को खोलते हैं, तो उस समय हम किसी अन्य कम्प्यूटर या सर्वर के साथ संचार कर रहे होते हैं। इस संचार को संभव बनाने में एक प्रमुख भूमिका होती है ‘हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल’ यानि HTTP की। इस लेख में हम HTTP kya hai इसके बारे में विस्तार से जानेंगे।

HTTP क्या है? (HTTP kya hai)-

HTTP (HyperText Transfer Protocol) एक प्रोटोकॉल है जो इंटरनेट पर जानकारी को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर या सर्वर के बीच संचार करने का तरीका है। इसे साधारणत: वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के बीच कनेक्शन स्थापित करने के लिए उपयोग किया जाता है। HTTP का मुख्य उद्देश्य वेब पेज्स और अन्य संसाधनों को इंटरनेट पर अनुरूप संचार करना है।

HTTP प्रोटोकॉल का उपयोग किसी भी इंटरनेट अनुप्रयोग के दो प्रमुख घटकों के बीच संचार करने के लिए होता है: क्लाइंट और सर्वर। क्लाइंट एक उपयोगकर्ता या उपकरण होता है जो एक अनुरोध करता है और सर्वर एक कंप्यूटर होता है जो उस अनुरोध को प्रक्रिया करता है और उत्तर देता है। यह एक बहुत ही सरल प्रक्रिया है जिसमें क्लाइंट अनुरोध भेजता है, सर्वर उसे प्रोसेस करता है, और फिर उत्तर को क्लाइंट के पास भेजता है।

HTTP kya hai

HTTP का इतिहास-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) का विकास 1990 के दशक में टिम बर्नर्स-ली ने शुरू किया था। उन्होंने एक प्रोटोकॉल बनाया जिसका उपयोग हाइपरटेक्स्ट के इंटरनेट पर डिलीवरी के लिए किया जा सकता था। पहले HTTP/0.9 था, जो सिर्फ पाठ को डिलीवर करने के लिए उपयोग होता था। यह अत्यंत सरल और प्रारंभिक था, लेकिन इसकी प्राचीनता के कारण यह अनुप्रयुक्त था।

1996 में HTTP/1.0 का आवेदन हुआ, जो नए सुविधाओं के साथ आया, जैसे कि निर्देश, हेडर, और परिप्रेक्ष्य। इसके बाद, 1999 में HTTP/1.1 आया, जो और अधिक उन्नत सुविधाओं के साथ आया, जैसे कि निर्देश, विषय, और गलतियों का प्रबंधन।

इसके बाद कई और संस्करण आये, जिसमें से सबसे हाल ही में 2015 में HTTP/2 और फिर 2021 में HTTP/3 है। HTTP/2 और HTTP/3 ने पूरी तरह से इंटरनेट संचार को बदल दिया है, जिसमें वेबसाइट्स को तेजी से लोड करने की क्षमता और सुरक्षा में सुधार है।

HTTP कैसे काम करता है?

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) एक प्रोटोकॉल है जो वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के बीच संचार को संचालित करता है। यह आमतौर पर निम्नलिखित प्रक्रिया के माध्यम से काम करता है-

  1. स्थापित कनेक्शन (Establishing Connection)- क्लाइंट एक वेब पेज तक पहुंचने के लिए अपने ब्राउज़र में URL दर्ज करता है। उसके बाद, ब्राउज़र HTTP रिक्वेस्ट बनाता है और उसे सर्वर को भेजता है।
  2. रिक्वेस्ट (Request)- यह रिक्वेस्ट ब्राउज़र द्वारा सर्वर को भेजा जाता है, जिसमें वेब पेज के लिए अनुरोधित डेटा और अन्य जानकारी होती है, जैसे कि रिक्वेस्ट मेथड (GET, POST, आदि), URL, और अन्य हेडर्स।
  3. प्रोसेसिंग (Processing)- सर्वर HTTP रिक्वेस्ट को प्राप्त करता है और उसे प्रोसेस करता है। यह सर्वर की ओर से डेटाबेस अनुरोध करने, अनुप्रयोग चलाने, या अन्य संचालनिक क्रियाओं को शामिल कर सकता है।
  4. रिस्पॉन्स (Response)- सर्वर रिक्वेस्ट का उत्तर देता है जो क्लाइंट द्वारा प्राप्त किया जाता है। रिस्पॉन्स में वेब पेज के डेटा, हेडर्स, और अन्य मेटा-जानकारी हो सकती है।
  5. डेटा स्थानांतरण (Data Transmission)- रिस्पॉन्स ब्राउज़र तक स्थानांतरित किया जाता है और ब्राउज़र द्वारा प्रोसेस किया जाता है। यदि डेटा में विशेषताएँ हैं (जैसे कि इमेजेस, वीडियो, या ऑडियो), तो यह ब्राउज़र द्वारा उपयुक्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
  6. कनेक्शन समाप्ति (Connection Termination)- एक बार जब डेटा संचार समाप्त होता है, कनेक्शन समाप्त किया जाता है। इससे ब्राउज़र और सर्वर के बीच कनेक्शन बंद हो जाता है।

HTTP के प्रकार-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो निम्नलिखित हैं-

1. HTTP/1.0-

  • सबसे पहला संस्करण था।
  • इसमें केवल सिम्पल टेक्स्ट प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता था।
  • अधिकांश वेब ब्राउज़र और सर्वर इस प्रोटोकॉल का समर्थन करते हैं, हालांकि यह पुराना है और उपयोगकर्ताओं को अधिक अनुकूलता प्रदान नहीं करता है।

2. HTTP/1.1-

  • यह संस्करण पिछले संस्करण के मुकाबले बेहतर सुविधाएं प्रदान करता है।
  • पाइपलाइनिंग, हॉस्ट, कैशिंग, और अन्य कई सुविधाएं शामिल हैं।
  • यह कनेक्शन को ओपन रखने के लिए सक्रिय रहता है, जिससे पेज लोडिंग की गति तेज होती है।

3. HTTP/2-

  • यह विस्तारित सुविधाओं और अधिक अनुकूलता प्रदान करता है।
  • इसमें मल्टिपलेक्सिंग, हेडर कंप्रेशन, और दूसरी तकनीकी Updates होती है।
  • यह पेज लोडिंग की गति को और भी तेज करता है और सुरक्षा में भी सुधार करता है।

4. HTTP/3-

  • यह संस्करण ट्रांसपोर्ट लेयर के लिए QUIC प्रोटोकॉल का उपयोग करता है।
  • यह TCP के स्थान पर UDP का उपयोग करता है, जो पेज लोडिंग की गति को और भी तेज करता है।
  • यह प्रोटोकॉल अधिक सुरक्षित और प्रदर्शन के साथ समर्थित होता है।

HTTP के मुख्य घटक-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) का निर्माण कई मुख्य घटकों से होता है जो इसको एक सशक्त प्रोटोकॉल बनाते हैं। निम्नलिखित हैं HTTP के मुख्य घटक-

1. रिक्वेस्ट मेथड (Request Method)- HTTP रिक्वेस्ट के लिए कई विभिन्न मेथड होते हैं, जैसे GET, POST, PUT, DELETE, HEAD, OPTIONS, आदि। ये मेथड बताते हैं कि क्लाइंट क्या क्रिया करना चाहता है और सर्वर को कैसे प्रतिक्रिया देनी है।

2. URL (Uniform Resource Locator)- URL एक विशिष्ट पता होता है जो वेब सर्वर पर रिसोर्स की पहुंच को संदर्भित करता है। यह स्थानांतरित डेटा या सेवा को निर्दिष्ट करता है जिसके लिए रिक्वेस्ट भेजा जाता है।

3. हेडर्स (Headers)- HTTP हेडर्स रिक्वेस्ट और रिस्पॉन्स में मेटा डेटा प्रदान करते हैं। इनमें क्लाइंट और सर्वर के बीच संदेश के विशेष विवरण, सत्यापन, कन्टेंट टाइप, कन्टेंट लेंथ, आदि शामिल होते हैं।

4. बॉडी (Body)- रिक्वेस्ट और रिस्पॉन्स बॉडी में डेटा शामिल होता है जो रिक्वेस्ट के साथ भेजा जाता है और सर्वर द्वारा उत्तरित किया जाता है। यह डेटा आमतौर पर टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, या अन्य मल्टीमीडिया सामग्री हो सकता है।

5. स्टेटस कोड (Status Code)- HTTP रिस्पॉन्स में स्टेटस कोड संदेश के साथ आता है जो बताता है कि रिक्वेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ है या नहीं। कुछ प्रमुख स्टेटस कोड हैं: 200 (OK), 404 (Not Found), 500 (Internal Server Error), आदि।

6. कनेक्शन (Connection)- HTTP में कनेक्शन वेब सर्वर और क्लाइंट के बीच संचार स्थापित करने के लिए होता है। कनेक्शन स्थापित किए जाने के बाद, कई रिक्वेस्ट्स को एक ही कनेक्शन के माध्यम से भेजा जा सकता है।

7. कैशिंग (Caching)- HTTP कैशिंग का उपयोग सर्वर और क्लाइंट के बीच डेटा के पुनः उपयोग को तेजी से करने के लिए किया जाता है। यह सर्वर को बोझ कम करता है और पेज्स की लोडिंग गति तेज होती है।

HTTP/1.1 के मुख्य विशेषताएँ-

HTTP/1.1 सबसे प्रचलित HTTP संस्करण है, और इसकी कई महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।

  • अनुरोध-प्रतिक्रिया- HTTP/1.1 में अनुरोध-प्रतिक्रिया प्रणाली होती है, जिसमें ब्राउज़र एक अनुरोध भेजता है और सर्वर एक प्रतिक्रिया भेजता है। इससे संचार तेजी से होती है और डेटा की खपत कम होती है।
  • पाइपलाइनिंग- HTTP/1.1 में पाइपलाइनिंग विशेषता होती है, जिससे कई अनुरोधों को एक ही कनेक्शन में संचालित किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि अनुरोधों की क्रमबद्धता में कोई विलम्ब नहीं होता है और संचार की गति बढ़ती है।
  • होस्ट हेडर- HTTP/1.1 में होस्ट हेडर की विशेषता होती है, जो वेब सर्वर को बताती है कि किस डोमेन पर अनुरोध प्राप्त हुआ है। यह मल्टीपल वेबसाइट होस्टिंग को संभव बनाता है और वेब सर्वर को अपनी सेटिंग्स के अनुसार उचित वेबसाइट को देखने की सुविधा प्रदान करता है।
  • कूकीज़- HTTP/1.1 में कूकीज़ का समर्थन होता है, जो ब्राउज़र को वेबसाइट के साथ बाध्यता बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह उपयोगकर्ताओं के डेटा को संचार करने के लिए मदद करता है, जैसे कि उनकी पसंदीदा भाषा या लॉगिन स्थिति।

HTTP/2 और HTTP/3 के विशेषताएं-

HTTP/2 और HTTP/3 ने HTTP प्रोटोकॉल को एक नई दिशा में ले जाया है।

  • अधिक तेजी- HTTP/2 और HTTP/3 में मल्टीपलेक्सिंग का समर्थन होता है, जिससे एक ही कनेक्शन पर कई अनुरोधों को संचालित किया जा सकता है। यह वेब पेजों को तेजी से लोड करने में मदद करता है।
  • सुरक्षा- HTTP/2 और HTTP/3 में डेटा को एन्क्रिप्ट करने के लिए TLS (Transport Layer Security) का उपयोग किया जाता है, जिससे डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • UDP पर आधारित संचार (HTTP/3)- HTTP/3 ने TCP के बजाय UDP (User Datagram Protocol) पर आधारित संचार का उपयोग किया है, जिससे संचार की गति में वृद्धि होती है और पैकेट लॉस कम होता है।

HTTP Error Code क्या है-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) में एरर कोड उन संकेतों को कहते हैं जो सर्वर या क्लाइंट द्वारा प्राप्त किए गए अज्ञात या अविश्वसनीय स्थितियों को दर्शाते हैं। ये एरर कोड HTTP प्रोटोकॉल के माध्यम से संदेशों को संचालन करने का एक तरीका होते हैं। इन्हें आमतौर पर सर्वर द्वारा उत्पन्न किया जाता है जब कि कोई अनुरोध प्रोसेस करने में समस्या होती है या कोई त्रुटि होती है। ये कोड वेब ब्राउज़र या अन्य HTTP क्लाइंट्स द्वारा प्राप्त किए जा सकते हैं और उन्हें समझने में मदद करते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) एरर कोड निम्नलिखित हैं-

  1. 404 नहीं मिला (Not Found)- यह एरर कोड सर्वर द्वारा उत्पन्न किया जाता है जब सर्वर किसी विशिष्ट रिसोर्स को नहीं ढूंढ पाता है। यह आमतौर पर जब यूज़र एक URL पर पहुंचने की कोशिश करता है और सर्वर उसे खोज नहीं पाता है, तो प्राप्त किया जाता है।
  2. 500 अंतर्निहित सर्वर त्रुटि (Internal Server Error)- यह एक सामान्य त्रुटि संदेश है जो उस समय प्राप्त होता है जब कि सर्वर प्रोसेसिंग के दौरान किसी अनुपेक्षित त्रुटि का सामना करता है।
  3. 403 प्रवेश निषिद्ध (Forbidden)- यह एक त्रुटि है जो उस समय प्राप्त होती है जब किसी यूज़र को विशिष्ट रिसोर्स तक पहुंचने की अनुमति नहीं है, चाहे वह रिसोर्स निजी हो या सर्वर द्वारा अनुमति न दी गई हो।
  4. 401 अनधिकृत (Unauthorized)- यह त्रुटि संदेश उस समय प्राप्त होता है जब कोई यूज़र विशिष्ट रिसोर्स तक पहुंचने के लिए पहले से ही प्रमाणित नहीं है।
  5. 400 गलत अनुरोध (Bad Request)- यह त्रुटि संदेश वेब सर्वर द्वारा प्राप्त होता है जब कोई क्लाइंट द्वारा भेजा गया अनुरोध वेब सर्वर के द्वारा समझा नहीं जाता है। यह त्रुटि सामान्यतः वेब फ़ॉर्म या अन्य अनुरोध प्रकारों में त्रुटि के कारण हो सकती है।

HTTP का उपयोग-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) का उपयोग विभिन्न इंटरनेट संचारों में किया जाता है, जैसे कि-

  • वेब ब्राउज़िंग- सभी वेब पेजों को ब्राउज़ करने के लिए HTTP का उपयोग किया जाता है। जब आप वेबसाइट पर जाते हैं, तो आपका ब्राउज़र HTTP अनुरोध भेजता है और सर्वर से डेटा प्राप्त करता है।
  • ईमेल- ईमेल क्लाइंट्स और सर्वर्स भी HTTP का उपयोग करते हैं जब वे ईमेल डेटा को स्थानांतरित करते हैं।
  • मीडिया स्ट्रीमिंग- HTTP का उपयोग मीडिया स्ट्रीमिंग सेवाओं में भी किया जाता है, जैसे कि YouTube या Netflix।

HTTP और HTTPS में अंतर-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) और HTTPS (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल सुरक्षित) दोनों ही इंटरनेट पर डेटा को स्थानांतरित करने के लिए प्रयुक्त प्रोटोकॉल्स हैं, लेकिन इनमें थोड़ा-बहुत अंतर है।

1. HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल)-

  • सुरक्षा- HTTP सुरक्षित नहीं है। जब डेटा HTTP के माध्यम से भेजा जाता है, तो वह अपने पूरे यात्रा के दौरान अनएन्क्रिप्टेड (अनएन्क्रिप्टेड) होता है, जिससे सुरक्षा समस्याएं हो सकती हैं।
  • पोर्ट- HTTP का डिफ़ॉल्ट पोर्ट 80 है।
  • उपयोग- HTTP का उपयोग सामान्यतः सार्वजनिक वेब पेज्स, टेक्स्ट, और अन्य सामान्य सामग्रियों को ब्राउज़ करने के लिए होता है।
  • SSL/TLS का अभाव- HTTP में SSL/TLS का अभाव होता है, जिससे डेटा को एन्क्रिप्ट नहीं किया जाता है।

2. HTTPS (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल सुरक्षित)-

  • सुरक्षा- HTTPS सुरक्षित है। इसमें SSL/TLS प्रोटोकॉल का उपयोग करके डेटा को एन्क्रिप्ट किया जाता है, जिससे डेटा का सुरक्षित स्थानांतरण होता है।
  • पोर्ट- HTTPS का डिफ़ॉल्ट पोर्ट 443 है।
  • उपयोग- HTTPS का उपयोग सुरक्षित तरीके से डेटा स्थानांतरित करने के लिए होता है, जैसे कि लॉगिन डेटा, फिनैंशियल ट्रांजैक्शन्स, और अन्य संवेदनशील जानकारी के लिए।
  • SSL/TLS का उपयोग- HTTPS में SSL (Secure Socket Layer) या TLS (Transport Layer Security) का उपयोग किया जाता है, जिससे डेटा को एन्क्रिप्ट किया जाता है।
  • गोल लॉक आइकन- जब आप HTTPS वेबसाइट पर होते हैं, तो आपको वेब ब्राउज़र में एक गोल लॉक आइकन दिखाई देता है, जिससे यह पता चलता है कि संदेश को एन्क्रिप्ट किया गया है और आपकी जानकारी सुरक्षित है।

HTTP का महत्व-

HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) का महत्व आज के संदर्भ में अत्यधिक है। यह आधुनिक इंटरनेट का एक महत्वपूर्ण अंग है और वेब डेटा संचार को सुगम बनाता है। यह वेब पृष्ठों के संचार के लिए आवश्यक है और आधुनिक डिजिटल जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है।

इस प्रकार, HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) एक महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल है जो वेब संचार को संचालित करने में मदद करता है। यह वेब ब्राउज़िंग, डेटा संचार, और डिजिटल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसके बिना सोचा भी नहीं जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)-

HTTP kya hai- HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) एक महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल है जो हमें इंटरनेट पर डेटा संचार करने में मदद करता है। यह वेबसाइट्स को सुरक्षित और तेजी से लोड करने में मदद करता है और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को एक अच्छा अनुभव प्रदान करता है। HTTP/2 और HTTP/3 जैसे नए संस्करण ने HTTP को और भी उन्नत बनाया है, और भविष्य में इसका उपयोग और भी बढ़ेगा।

FAQs

HTTP किसे कहते हैं?

HTTP  का मतलब होता है हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल, जो वेबसाइटों के बीच डेटा संचार को संचालित करता है।

HTTPS का मतलब क्या है?

HTTPS इंटरनेट संचार के लिए सुरक्षित हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल है, जो SSL/TLS का उपयोग करके डेटा को एन्क्रिप्ट करता है।

HTTP/2 का क्या उपयोग है?

HTTP/2 वेब साइटों की गति को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और सुरक्षित संचार को प्रदान करता है।

क्या HTTP कुकीज़ कोई सुरक्षा का खतरा है?

नहीं, HTTP कुकीज़ ज्यादातर सत्र प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाता है और सुरक्षा का खतरा नहीं होता है।

क्या HTTP/3 भविष्य में कितना महत्वपूर्ण होगा?

HTTP/3 ने वेबसाइट के संचार में और तेज़ी और सुरक्षा लाया है, जिससे इसका महत्व भविष्य में और भी बढ़ेगा।

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